गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर में स्थित श्रीश्रृंगेरी शारदा पीठ पाठशाला के आचार्य राघवेंद्र भट्ट को इंडोनेशिया में संस्कृति पुरोधा सम्मान मिला है। दुनिया भर में संस्कृत भाषा  और भारतीय संस्कारों का प्रचार प्रसार करने के लिए आचार्य भट्ट को ये सम्मान इंडोनेशिया के उधोग जगत और सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने वाली अकार्या इंटरनेशनल संस्था ने दिया है।
सम्मान समारोह से पहले इंडोनेशिया के जकार्ता में एक हवन हुआ और घंटों तक संस्कृत में श्लोकोच्चारण हुए। आचार्य भट्ट पिछले कई सालों से विश्व के अनेक देशों में पहुंचकर वहां रह रहे भारतीय मूल के लोगों के साथ साथ विदेशियों को भी  भारतीय पूजा पद्त्ति , भारतीय संस्कार के प्रति जागरूक करने के अलावा उन्हें संस्कृत भाषा का ज्ञान भी दे रहें हैं। सम्मान देते हुए अकार्या इंटरनेशनल संस्था के अध्यक्ष विनोद लारॉय ने आश्वासन दिया कि संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए  आचार्य जी की  हर वर्ष विदेशी यात्रा का प्रबंध किया जायेगा।  ताकि संस्कृति और संस्कारों का विश्व में फैलाव हो सके।
आचार्य भट्ट को  संस्कृति पुरोधा सम्मान दिए जाने पर देश के अनेक संस्कृत व् हिंदी भाषा के विद्वानों ने ख़ुशी जाहिर की है। हरियाणा संस्कृत अकादमी के  उपाध्यक्ष श्रेयांश दिवेदी, विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधा कृष्ण मरोड़ी, मधुरा स्थित श्रीश्रृंगेरी शारदा  पीठ पाठशाला के धर्माधिकारी उद्धव, वृंदावन के प्रसिद्ध भागवत कथा वाचक पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने कहा है कि आचार्य भट्ट ने न  केवल संस्कृत को दुनिया भर में फैलाया है , बल्कि भारत का नाम रोशन किया है।
आचार्य भट्ट के शिष्य रजनीश भारद्वाज ने बताया कि आचार्य भट्ट मूल रूप से कर्नाटक के जिला  उड्ड्प्पी के गांव शंकरनारायण के  रहने वाले हैं। श्रीश्रृंगेरी शारदा  पीठ कर्नाटक से संस्कृत व् वेद की शिक्षा लेने के बाद उन्हें   १६ जनवरी २०११  को   गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर में स्थित श्रीश्रृंगेरी शारदा पीठ पाठशाला में धर्माधिकारी नियुक्त किया गया। अभी उनके पास पाठशाला में ५० गरीब घरों के बच्चें हैं, जिन्हे वेदों व संस्कृत भाषा की शिक्षा दी जा रही है।

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