मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास का मतलब कंक्रीट के जंगल खड़े करना नहीं है। विकास प्रक्रिया को प्रकृति और जैव पारिस्थितिकी को ध्यान में रखकर संचालित किया जाना चाहिए। प्रकृति के निकट रहकर ही जीवन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधा के लिए जो भौतिक साधन विकसित किए हैं, उनसे ग्लोबल वार्मिंग जैसी विसंगतियां पैदा हो रही हैं, जोे अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन रही हंै। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रकृति के जितना अधिक निकट रहेगा, उतना ही स्वस्थ निरोगी और प्रसन्न रहेगा।

मुख्यमंत्री नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के बारादरी लाॅन में आयोजित वन्य प्राणि सप्ताह समापन समारोह के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पूर्व, मुख्यमंत्री ने प्राणि उद्यान में स्थापित ‘प्रकृति शिक्षण केन्द्र’ का लोकार्पण किया। इस केन्द्र में लोगों को प्रदेश में पाए जाने वाले वन्य जीवों, अभ्यारण्यों, ईको टूरिज्म आदि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने वन्य प्राणि सप्ताह (01 अक्टूबर से 07 अक्टूबर, 2017) के दौरान प्रदेश में वन्य जीवों के प्रति जन-जागरूकता पैदा करने के लिए आयोजित विभिन्न गतिविधियों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वन्य जीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के विभिन्न वन्य प्राणियों को अंगीकृत करने वाले लोगों को सम्मानित किया। साथ ही, प्राणि उद्यान के सीनियर कीपर, मुबारक अली तथा चिकित्सक डाॅ. उत्कर्ष शुक्ला को भी पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘जू कीपर्स मैनुअल’ तथा नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में रखे गये वन्य जीवों पर आधारित एक ‘फोटो परिचय पुस्तिका’ का विमोचन भी किया।
वन्य जीव सप्ताह के आयोजन को भारतीय प्राचीन अरण्य संस्कृति को याद करने का अवसर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन ऋषि परम्परा ने पर्यावरण और प्रकृति के साथ समरसता और समन्वय की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि दशावतारों के रूप में मनुष्य के विकास की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रकृति से मनुष्य के निकट सम्बन्ध को उजागर करती है। साथ ही, भारतीय मनीषा का प्रकृति से समन्वय भी प्रदर्शित करती है, जो यह सीख देती है कि प्रकृति के साथ के बिना विकास की प्रक्रिया सम्पूर्ण नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में प्रतिवर्ष 12 से 14 लाख लोग आते हैं। यह संख्या काफी कम है, प्राणि उद्यान का प्रचार-प्रसार करके यहां आने वाले लोगों की संख्या को बढ़ाकर 50 लाख तक किया जा सकता है। प्राणि उद्यान के जीवों पर प्रकाशित फोटो परिचय पुस्तिका को रेलवे स्टेशनों, होटलों, पर्यटक स्थलों आदि पर प्रदर्शित कर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इससे प्राणि उद्यान की आय में वृद्धि होगी साथ ही, प्राणि उद्यान में कुछ नया करना भी सम्भव होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आने वाले अधिसंख्य पर्यटक दिल्ली के बाद राजस्थान की तरफ चले जाते हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म की अपार सम्भावनाएं हैं। उन्होंने वन विभाग को भारत आने वाले पर्यटकों को उत्तर प्रदेश में आकर्षित करने के लिए विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक वृहद कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ईको टूरिज्म स्थलों को पर्यटन हेतु आवश्यक सभी सुविधाओं से युक्त करके पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाए।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वन मंत्री दारा सिंह चैहान ने कहा कि राज्य सरकार वन्य जीवों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रयासरत है। जिन प्रजातियों का लोप हो रहा है उन्हें बचाने के लिए लगातार काम हो रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से बाघ, गिद्ध और गैण्डों की संख्या में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि गिद्ध का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि इस पक्षी का पर्यावरण का स्वच्छता में भी बड़ा योगदान होता है।
कार्यक्रम के पश्चात् मुख्यमंत्री ने प्राणि उद्यान में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन में बैठकर प्राणि उद्यान का अवलोकन किया।

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