जुलाई 1, 2017: इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाये जाने की दिशा में सफलता का एक और कदम आगे बढ़ गया है। इलाहाबादवासियों के लिये यह एक बड़ी खुशखबरी है कि मण्डलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल और जिलाधिकारी संजय कुमार के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के दल को दिल्ली में शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी बनाये जाने सम्बन्धी सभी विकास कार्यों के प्रस्तावों को तेज गति से पूरा करने में सहयोग करने का आश्वासन दिया है और अधिकारियों के इस प्रस्ताव को हरी झण्डी दे दी है। गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों के प्रयास के उपरान्त इलाहाबाद को देश के स्मार्ट बनाये जाने वाले 100 शहरों की सूची में एक सप्ताह पहले ही स्थान मिला है। इसे लेकर बड़े उत्साह के साथ यहां के प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मण्डलायुक्त डॉ. आशीष गोयल और जिलाधिकारी के नेतृत्व में स्मार्ट सिटी का खाका बनाने में तेजी से जुट गयी थी।

वैसे तो इलाहाबाद में विकास के आधुनिकतम पैमानों पर सड़कों, यातायात व्यवस्थाओं, सफाई, फ्लाईओवर और अण्डरपास के निर्माण अर्द्धकुम्भ 2018-19 के मद्देनजर कराये जाने की कवायदें मण्डलायुक्त और जिला प्रशासन के स्तर से पिछले कई माह से की जा रही हैं। लेकिन इलाहाबाद को स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल कर लिये जाने के बाद इलाहाबाद में अर्द्धकुम्भ, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे, अमृत योजना इत्यादि कई प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी के विकास की परियोजना से अब सीधे जुड़ गये हैं।
मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी के द्वारा विकास सम्बन्धी सभी कार्यदायी विभागों को तेजी के साथ विकास की रूप रेखा तैयार करने की हिदायत पिछले माह से दी जाती रही है और इस प्रारूप पर विचार करते हुए इससे सम्बन्धित वित्तीय व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा करने के लिये मण्डलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल के साथ जिलाधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक प्रमुखों का एक दल 30 जून को शहरी विकास मंत्रालय में केन्द्रीय मंत्री, वेंकैया नायडू से मिलकर इलाहाबाद के विकास की भावी रूप रेखा से उन्हें अवगत कराया है और स्मार्ट सिटी के विकास के लिये सहयोग और बजट की मांग की है।
अधिकारियों का यह दल उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के नेतृत्व में वैंकैया नायडू से मिला और इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाये जाने के बारे में उनसे चर्चा की।
वैंकैया नायडू की ओर से इलाहाबाद के विकास के लिये इस प्रतिनिधिमण्डल को पूरा तरह से आश्वस्त किया गया है कि इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाये जाने के सम्बन्ध में भारत सरकार हर प्रकार से नीतिगत और वित्तीय सहयोग देती रहेगी तथा इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाये जाने में किसी भी आवश्यक संसाधन की कमी नहीं होने पायेगी।
इस दिशा में नायडू ने इलाहाबाद के इस प्रतिनिधिमण्डल को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाये जाने के सम्बन्ध में जो भी युक्तिसंगत प्रस्ताव भेजे जायेंगे, उनपर आपसी समन्वय के साथ हर तरह का सहयोग देकर अर्द्धकुम्भ के पूर्व शहर को स्मार्ट सिटी बनाये जाने में भारत सरकार साथ खड़ी रहेगी और हर संभव सहयोग करेगी।
भारत सरकार द्वारा सहयोग के इस आश्वासन के बाद इलाहाबाद को अर्द्धकुम्भ 2018-19 तक स्मार्ट सिटी बना दिये जाने के स्थानीय प्रशासन के संकल्प को एक संजीवनी मिल गई है और इलाहाबाद के शहरियों को उनकेे शहर के आधुनिकतम पैमाने पर विकसित होने का आश्वासन भी प्राप्त हो गया है।
भारत सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत जिन कुल सौ शहरों का विकास किया जाना था, उसमें इलाहाबाद को भी स्थान मिल जाने के बाद अब यहां के स्थानीय प्रशासन द्वारा जो तैयारी भारत सरकार को प्राथमिक तौर पर प्रस्तावित की गई है, उसमें यहां के मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में एक एसपीवी (स्पेशल पर्पज वैहकिल) का गठन किया जाना है।
अधिकारियों की यह संस्था द्वारा इलाहाबाद के विकास के लिये जनसहभागिता के आधार पर डोर-टू-डोर, पर्सन-टू-पर्सन एवं सोशल मीडिया के वाट्सप, ट्वीटर आदि माध्यमों से जनता की राय लेकर उसी आधार पर शहरी विकास मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक परामर्शदाता संस्था द्वारा प्रारूप और विजन पर इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना है।
इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिये जाने के बाद इसे न केवल एक विकसित शहर बल्कि इसे आर्थिक समृद्धि का उभरता हुआ केन्द्र बनाया जाना भी प्रस्तावित है, जिसमें इसे शिक्षा और संस्कृति के साथ-साथ उद्योग, व्यापार और आधुनिक बाजार के रूप में भी प्रस्तुत किया जाना है। इस शहर को एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के आधार पर पूर्वी, मध्य और पश्चिमी इलाहाबाद को क्षेत्रवार चिन्हित करते हुए विकसित करने की योजना है तथा हर विकसित क्षेत्र को मॉडल बनाते हुए सम्पूर्ण शहर को उसी मानक पर विकसित करना स्मार्ट सिटी मिशन का लक्ष्य है।
सम्पूर्ण शहर को ऐसी सेवाओं से जोड़ा जाना भी इस मिशन के अन्तर्गत प्रस्तावित है जो इन्फारमेशन टेक्नॉलाजी के मदद से शहरवासियों के जीवनस्तर को स्मार्ट कर सके। एरियाबेस्ड डेवलपमेंट के अन्तर्गत लगभग 1,900 एकड़ से अधिक क्षेत्र को लक्ष्य करते हुए शहर के कटरा, सिविल लाइन्स, मम्फोर्डगंज आदि का क्षेत्र मॉडल के रूप में चयनित किया गया है, जिसके विकास के उपरान्त सम्पूर्ण शहर को अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार सुविधा सम्पन्न बनाया जाना प्रस्तावित है।
इस परियोजना में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इन्क्यूवेशन सेन्टर की स्थापना, ऐतिहासिक स्थलोें का विकास, जलापूर्ति और जलनिकासी व्यवस्था का आधुनिकीकरण, वाटर ट्रीटमेंट और कचरा प्रबंधन, रेलवे स्टेशन पर पर्यटक सुविधा केन्द्रों की स्थापना, खुली जगह और पार्कों का विकास, इमरतों पर सोलर पैनलों का इंतजाम, महिला थाना और पुलिस चौकियों की स्थापना, त्रिवेणी संगम स्थल का विकास, महानगर बस सेवा का आधुनिकीकरण, सतर्क ट्रैफिक व्यवस्था, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना, इलाहाबाद में हेरिटेज जोन का विकास और स्कूलों/उच्च शिक्षण संस्थानों में आईटी कनेक्टीविटी पर लगभग 2,240 करोड़ रूपये के व्यय का अनुमान प्राथमिक तौर पर भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री, वेंकैया नायडू के साथ इलाहाबाद के अधिकारियों की बैठक में प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रस्ताव पर पूरे सहयोग का आश्वासन और प्राथमिक तौर की योजना पर भारत सरकार ने हरी झण्डी दे दी है। इलाहाबाद से चयनित विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह तथा कमिश्नर डॉ. आशीष कुमार गोयल और जिलाधिकारी संजय कुमार ने इस आश्वासन पर भारत सरकार और कैबिनेट मंत्री का आभार जताया।

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