उत्तर प्रदेश में प्रमुख एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्गों के आस-पास टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना की जाएगी। प्रदेश सरकार का निजी क्षेत्र के टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जाने पर विशेष जोर है। इसके दृष्टिगत लखनऊ-कानपुर, कानपुर-इलाहाबाद, चित्रकूट-झांसी-ललितपुर, वाराणसी-इलाहाबाद, दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-मुरादाबाद, बरेली-मुरादाबाद-बिजनौर, मेरठ-नजीबाबाद, गोरखपुर-वाराणसी और गोरखपुर-फैजाबाद जोन के चारो तरफ निजी क्षेत्र के टेक्सटाइल पार्क/आस्थान विकसित किए जाने के विशेष प्रयास किये जाएंगे। उ.प्र. वस्त्रोद्योग, हथकरघा एवं रेशम उद्योग नीति-2017 के प्रस्तावित प्रारूप में इसका प्रावधान किया गया है।
प्रदेश सरकार एफडीआई को आकर्षित करने के लिए देश-विशिष्ट टेक्सटाइल पार्कों को भी बढावा दे रही है। इनमें ट्रक टर्मिनल्स और कर्मचारियों के लिए आवास सुविधाओं सहित लाजिस्टिक सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया जायेगा। टेक्टसटाइल पार्क के विकासकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार सुविधाएं भी देगी।
निजी क्षेत्र के टेक्सटाइल पार्क के लिए बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्यांचल और पश्चिमांचल (नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी को छोड़कर) में 50 एकड़ या उससे अधिक के भूखण्ड की खरीद पर विकासकर्ता संस्था को 100 फीसदी तक स्टाम्प डयूटी में छूट/प्रतिपूर्ति अनुमन्य होगी। इनमें कर्मचारियों के आवास होस्टल/डोरमेट्री निर्माण हेतु लिए गए ऋण पर वार्षिक 60 प्रतिशत ब्याज की सीमा तक ब्याज प्रतिपूर्ति सात वर्ष के लिए अनुमन्य होगी। इसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ प्रतिवर्ष प्रति टेक्सटाइल पार्क/आस्थान तथा 30 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक ब्याज उपादान दिया जायेगा।
प्रस्तावित नीति में यह भी प्रावधान है कि 50 एकड़ या उससे अधिक के क्षेत्र में निजी टेक्सटाइल पार्क में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु लिये गये ऋण पर सात वर्षों तक 60 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी। इसकी अधिकतम सीमा 10 करोड़ प्रतिवर्ष प्रति टेक्सटाइल पार्क और 50 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक ब्याज उपादान किया जायेगा। इसके अलावा भूमि खरीद हेतु लिए गए ऋण पर वार्षिक ब्याज के 50 प्रतिशत धनराशि की प्रतिपूर्ति सात वर्ष तक की जायेगी। यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रूपये प्रतिवर्ष होगा।

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