खेलने-कूदने की उम्र में बच्चों से श्रमदान कराना, देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है- स्वामी प्रसाद मौर्य

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उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि हमारा सामाजिक परिवेश ऐसा होना चाहिए कि बच्चों के अभिभावक और सेवायोजक दोनों बाल श्रम के विरोध में खड़े होकर बाल मजदूरी को रोकने का पूर्ण संकल्प लें। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज के लिए बाल श्रम एक अभिशाप है। बड़े पैमाने पर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में, चाय-पंचर की दुकानें, होटल से लेकर बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिक मौजूद है। इसे रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेवारी है।

श्रम मंत्री मौर्य इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 20 जिलों के 919 गांव को बाल श्रम से मुक्त किये जाने के लिए नया सेवरा योजना का लोकार्पण भी किया।

उन्होंने कहा कि बेशक बाल श्रम के लिए गरीबी, अशिक्षा, अज्ञानता जिम्मेवार है फिर भी हम जनकल्याण संगोष्ठी के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम का अभियान चलाकर इस अभिशाप से प्रदेश को मुक्त करा सकते है। उन्होंने कहा कि खेलने-कूदने की उम्र में बच्चों से कड़ी मेहनत लेना, श्रमदान कराना, देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और क्रूर मजाक भी। बाल श्रम से हम इनका बचपन ही नहीं छीनते बल्कि इनका शारीरिक और मानसिक विकास भी रोकते है और ऐसा करके हम न केवल कानूनी जुर्म करते है बल्कि नैतिक अपराध भी करते है।

श्रम मंत्री ने कहा कि ऐसे जिले जहां कुटीर उद्योग बड़े उद्योग का रूप ले रहे हैं। वहां बाल श्रम रोकने के लिए प्राथमिकता पर प्रत्येक जिले में चार जन जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया जाए और लोगों को समझा बुझाकर इस अभिशाप के खिलाफ खड़ा भी किया जाए।

उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में तकनीकि ज्ञान का भी समावेश हो ताकि इन बच्चों की शिक्षा के प्रति रूचि बढ़े। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों पर भी ध्यान दिया जाय, जो बच्चों को अपाहिज बनाकर, लालच देकर भीख मंगवाते हैं।

उन्होंने बाल श्रमिकों को बाल श्रम से बचाने के लिए गोण्डा जनपद के प्रशासनिक अधिकारियों की गोद लेने की प्रथा की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ श्रमिकों को मिले।

उन्होंने कहा कि अधिकारी श्रमिकों के पास पहुंचने के लिए लेबर चैराहों पर जाए और इनका पंजीयन कराये। उन्होंने श्रमिकों की स्थिति को देखते हुए श्रमिक पंजीयन राशि 100 रुपये के बजाय 25 रूपये करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश एवं देश की सरकार की मंशा समाज की अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।मौर्य ने कहा कि प्रदेश में बाल श्रम से सर्वाधिक प्रभावित 20 जिलों में नया सवेरा योजना की कार्य योजना को प्रभावी तौर पर लागू करें ताकि प्रदेश को बाल श्रम से शीघ्र ही मुक्ति मिले। जिला प्रशासन गोण्डा द्वारा बाल श्रमिकों के पुर्नवासन हेतु सर्वोदय योजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया और लखनऊ मण्डल के 17 लाभार्थियों को कन्डीशनल कैश ट्रान्सफर योजना के तहत चेक वितरण भी किया गया।

बाल श्रम उन्मूलन कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव श्रम एंव सेवायोजन आर.के. तिवारी, अपर मुख्य सचिव एवं श्रम आयुक्त पी.के. महान्ति, अपर श्रमायुक्त, शकुन्तला गौतम, उ.प्र. यूनिसेफ प्रमुख रूथ लियानों ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में गोण्डा, बहराइच और बलरामपुर जनपद के जिलाधिकारी के साथ-साथ प्रदेश भर से जनप्रतिनिधि, श्रम उन्मूलक संगठन, शिक्षक एवं श्रमिक बच्चे व अभिभावकों ने प्रतिभाग किया।

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