उत्तर प्रदेश को केन्द्रीय सड़क निर्माण निधि से Rs 10,000 करोड़ की सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान की गयी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों बुन्देलखण्ड एवं पूर्वांचल को छः लेन व चार लेन मार्गों से जोड़ा जायेगा। इसी श्रृंखला में तिरवा से झांसी तक छः लेन तथा चित्रकूट से इलाहाबाद तक चार लेन एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए सैद्धान्तिक स्वीकृति सहित शीघ्रातिशीघ्र डीपीआर प्रस्तुत करने का निर्णय हुआ है

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उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों तथा भारत सरकार के सड़क एवं राजमार्ग विभाग के अधिकारियों के मध्य नई दिल्ली स्थित परिवहन भवन में प्रदेश में लम्बे अरसे से लम्बित परियोजनाओं पर परिचर्चा, आपसी सहमति, निस्तारण, स्वीकृति एवं अनुमोदन हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गयी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश की विभिन्न सड़क परियोजनाएं काफी लम्बे अरसे से स्वीकृति एवं अनुमोदन की प्रत्याशा में लम्बित थी

प्रस्तावित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं स्वीकृति की दिशा में केन्द्र सरकार द्वारा सैद्धान्तिक सहमति एवं स्वीकृति प्रदान करते हुए केन्द्रीय सड़क निर्माण निधि से निर्माण हेतु 10 हजार करोड़ रुपए की सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान की गयी, जो पिछली सरकारों की निष्क्रियता से काफी लम्बे समय से अनिस्तारित थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों बुन्देलखण्ड एवं पूर्वांचल को छः लेन व चार लेन मार्गों से जोड़ा जायेगा। इसी श्रृंखला में तिरवा से झांसी तक छः लेन तथा चित्रकूट से इलाहाबाद तक चार लेन एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए सैद्धान्तिक स्वीकृति सहित शीघ्रातिशीघ्र डीपीआर प्रस्तुत करने का निर्णय हुआ है। इसी प्रकार प्रदेश के मुख्य पर्यटक स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने की योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
योगी ने बताया कि जनपद इलाहाबाद में गंगा-यमुना के पावन संगम पर विश्व प्रसिद्ध कुम्भ एवं अर्द्ध कुम्भ का आध्यात्मिक आयोजन होता है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान एवं पुण्य लाभ के लिए आते हैं। विशेष तिथियों में आयोजित पर्वों पर यह संख्या और भी बढ़ जाती है। अतः इलाहाबाद को मूलभूत सुविधाओं एवं अवस्थापनाओं से सुसज्जित करना सरकार का दायित्व है।
बैठक में इलाहाबाद में आन्तरिक रिंग रोड एवं फाफामऊ में 2,407 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण के लिए भी सहमति हुई। यातायात को सुगम बनाने एवं आवागमन सुविधाओं के सृदृढ़ीकरण हेतु प्रदेश के अन्य शहरों जैसे गोरखपुर, बरेली, कानपुर, मेरठ, लखनऊ, मुरादाबाद में भी रिंग रोड के निर्माण तथा प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सात मार्गों पर एलिवेटेड रोड बनाने का भी निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री द्वारा यह जानकारी भी दी गयी कि प्रदेश में लगभग 6,207 किमी लम्बे राजमार्गों की संख्या लगभग 73 है। भारत सरकार के परिवहन मंत्रालय से यह आग्रह किया गया है कि इन मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में बदलने की प्रक्रिया हेतु सहमति प्रदान की जाए। इस दिशा में भी आज की बैठक में सकारात्मक कार्यवाही के लिए आश्वस्त किया गया।
प्रदेश के सभी गांव सम्पर्क मार्गों के साथ राजमार्गों से जुड़ें, इसके लिए सांसद निधि तथा प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना के अन्तर्गत कार्य योजना तैयार करने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है, जिसमें केन्द्रीय अंशदान एवं सैद्धान्तिक स्वीकृति पर सहमति प्रदान की गयी।
प्रदेश की लगभग 1.20 लाख किमी सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा विषेष अभियान चलाया जा रहा है। बरसात होने से पूर्व आम जनता को कोई परेशानी न हो, सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए, इस दिशा में युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री के विशेष सहयोग एवं सड़क निर्माण के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृति तथा लम्बित योजनाओं के निस्तारण हेतु लिये गये निर्णयों के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया ।
इस अवसर पर केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि केन्द्र सरकार सड़क निर्माण के साथ जल परिवहन की दिशा में भी महत्वपूर्ण एवं क्रान्तिकारी कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि इन्लैण्ड वाटरवेज अथारिटी द्वारा वाराणसी से हल्दिया तक गंगा नदी में 1,680 किमी जल परिवहन की व्यवस्था की जा रही है, जिसमें गंगा नदी के किनारे 40 रिवर पोर्ट की स्थापना की जाएगी।
इस जल परिवहन व्यवस्था से गंगा नदी पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, बंगाल के विभिन्न स्थलों पर यातायात व आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था को बढ़ावा देने, पर्यटन, निवेश व रोजगार के साधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी कारगर कदम उठाये जायंगे। मुख्यमंत्री से मंत्रणा के उपरान्त निकट भविष्य में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस योजना का एक भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
गडकरी ने कहा कि वर्ष 2019 में इलाहाबाद में आयोजित होने वाले अर्द्धकुम्भ मेले के अवसर पर वाराणसी व इलाहाबाद के बीच गंगा नदी में वाटर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था पर भी प्रस्ताव विचाराधीन है। केन्द्र सरकार सड़क परिवहन के अलावा जल परिवहन को भी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम कर रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित योजनाओं एवं कार्यक्रमों पर सैद्धान्तिक सहमति सहित सकारात्मक कार्यवाही के लिए भी आश्वस्त किया।
इस अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव लोक निर्माण सदाकान्त सहित विभागीय उच्चाधिकारीगण मौजूद थे।

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