गुरुग्राम: गुरुग्राम के उपायुक्त हरदीप सिंह ने आज प्रदेश सरकार द्वारा शुरू कि ए गए स्टैंडर्ड ओप्रेटिंग प्रोसिज़र (एसओपी)का उपमंडल अधिकारी (ना0) उत्तरी गुरुग्राम के कार्यालय से विधिवत् शुभारंभ किया। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री की सुशासन सहयोगी सुरेखा यादव भी उपस्थित थी।

उपायुक्त ने उत्तरी गुरुग्राम के एसडीएम कार्यालय के निकट स्थित ई-दिशा केन्द्र में एसओपी लागू करने के लिए फैसिलिटेशन सैंटर स्थापित किया है जहां पर जाकर कम्प्युटर पर क्लिक करके इस नई सुविधा की शुरूआत की। श्रीमति सुरेखा यादव ने उपायुक्त को स्टैंडर्ड ओप्रेटिंग प्रोसिज़र के बारे में विस्तार से बताया। उपायुक्त ने ई-दिशा केन्द्र में ड्राईविंग लाईसैंस(डीएल) बनवाने आए लोगों से भी बातचीत की।

उपायुक्त ने कहा कि ई-दिशा केन्द्र में नए एसओपी सॉफ्टवेयर की शुरूआत हो गई है। लोगों को इस एसओपी के माध्यम से ड्राइविंग लाइसैंस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया आदि समझाने के लिए े फेसिलिटेशन सैंटर भी बनाया गया है ताकि दलालों की भूमिका खत्म हो और लोग खुद फाइल तैयार करवा सकें। अब ड्राईविंग लाइसैंस बनवाने के इच्छुक व्यक्ति  को 50 रूपये में मिलने वाला फाइल कवर 10 रूपये में ही दिया जाएगा। डीएल के लिए फीस अदायगी अब सिंगल विंडो सिस्टम से होगी ताकि आवेदक को इधर-उधर भटकना ना पड़े। फैसिलिटेशन सैंटर पर तैनात कर्मचारी आवेदक की डीएल का फार्म भरवाने में पूरी मदद करेगा।

उन्होंने बताया कि एसओपी सॉफ्टवेयर के अंतर्गत डीएल बनवाने का इच्छुक व्यक्ति अब ‘परिवहन वैबसाईट’ पर जाकर सीधे आवेदन कर सकता है और फीस अदा करने के साथ साथ स्टॉल टैस्ट के लिए स्लॉट बुक कर सकता है। स्टॉल टैस्ट एक कम्प्युट्ररीकृत टैस्ट होता है जो लर्नर ड्राइविंग लाइसैंस के आवेदक के लिए ही अनिवार्य है। परमानेंट ड्राइविंग लाइसैंस बनवाने वाले आवेदक को स्टॉल टैस्ट देने की जरूरत नही है। आवेदक अपने ऑनलाइन भरे हुए फार्म का प्रिंट लेकर उसके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्र करके फाइल तैयार करे। लर्नर लाइसैंस के लिए फार्म-2, आवेदक की तीन रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो और आयु का प्रमाण जिसमें पासपोर्ट, वोटर आईकार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र , आधारकार्ड, केन्द्र या राज्य सरकार अथवा स्थानीय निकाय द्वारा जारी नियोक्ता प्रमाण पत्र, आईडी कार्ड की सत्यापित कापी के साथ संलग्र किए जाने चाहिए। परमानेंट ड्राइविंग लाइसैंस के आवेदक को अपने दस्तावेजो के साथ फार्म-4 व फार्म-6 भरकर देना है।

इसके बाद आवेदक उस फाइल को लेकर एसडीएम कार्यालय के क्लर्क के पास जाएगा और उसकी फिजिकल वैरिफिकेशन करवाएगा कि कहीं दस्तावेजो की कमी तो नही है। ऐसे में यदि किसी कमी की वजह से फाइल रिजैक्ट होती है तो उसका स्पष्ट कारण लिखना जरूरी है और आवेदक को वह कमी दूर कैसे होगी उसके बारे में भी समझाया जाएगा। सभी दस्तावेज पूरे करने के बाद आवेदक उस फाइल को काऊंटर पर जमा करवाएगा जहां पर उसकी ऑन द स्पॉट फोटो ली जाएगी और यदि उसने फीस जमा नही की है तो उससे निर्धारित फीस ली जाएगी। साथ ही यदि स्टॉल टैस्ट के लिए पहले से स्लॉट बुक नही किया गया है तो उसकी बुकिंग भी की जाएगी। दिए गए समय के अनुसार आवेदक को स्टॉल टैस्ट के लिए ई-दिशा केन्द्र में आना होगा और उसी समय उसका रिजल्ट बता दिया जाएगा। यदि आवेदक टैस्ट में फे ल हो जाता है तो उसे दोबारा स्लॉट बुक करना पड़ेगा और दोबारा से स्टॉल टैस्ट में बैठना होगा। जब तक वह इस टैस्ट में पास नही होगा, तब तक उसे बार-बार इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। पास होने के बाद लर्नर ड्राइविंग लाइसैंस स्पीड पोस्ट से आवेदक के घर भेज दिया जाएगा। यदि आवेदक स्टॉल टैस्ट में पास हो जाता है तो वह अपना लर्नर लाइसैंस डाऊनलोड करके प्रिंट कर सकता है।

एसओपी के तहत अब व्यक्ति ना केवल घर बैठे ड्राईविंग लाइसैंस का फार्म भरने में सक्षम होगा बल्कि उसे कम्प्युटर पर लिये जाने वाले टैस्ट के लिए भी अप्वाईंटमेंट लेने की सुविधा मिलेगी। पहले ड्राईविंग लाईसैंस बनवाने के लिए आवेदक को एसडीएम कार्यालय के कई चक्क र लगाने पड़ते थे । अब डीएल के लिए  प्रदेश सरकार द्वारा मैडिकल टैस्ट करवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब लोग बिना मैडिकल टैस्ट करवाए भी डीएल बनवा सकते हैं। आवेदक  की उम्र यदि 50 साल से कम है तो उसे अपनी फिटनेस का सैल्फ डिक्लेरेशन देना होगा और 50 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों को अपना नया डीएल बनवाने या रिन्यू करवाने के लिए मैडिकल टैस्ट करवाना पड़ेगा परंतु उन्हे सरकार द्वारा यह छूट दी गई है कि वे किसी एमबीबीएस डॉक्टर से मैडिकल फिटनैस का प्रमाण ला सकते हैं। पहले मैडिकल फिटनेस के लिए एसडीएम कार्यालय के निकट ही सरकारी डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाती थी।

इस प्रणाली के लागू होने से अब गुरुग्राम में डीएल बनवाने वाले लोगों को पहले की अपेक्षा 200 रूपये कम भरने पड़ेंगे। पहले 100 रूपये एमसी टैक्स तथा 100 रूपये मैडिकल टैस्ट के लिए भरवाए जाते थे, जो अब नही लिए जाएंगे।

 

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